सूना आंगन -01-Aug-2024
प्रतियोगिता हेतु
दिनांक: 01/08/2024
सूना आंगन
उस सूने आंगन को आज
भी हर कोई याद करता है
जहां कभी कल हमारा
बचपन बीता था।
एकाएक,,,,
खामोशी की दीवार,
बीच में आ गई थी
चचा- ताऊ की लड़ाई में।
पर आंगन तो
फिर भी वहीं का वहीं था।
दिलों में बेशक,,,
वो मोहब्बत नहीं थी पहले जैसी पर,
एक दूसरे के लिए,
तड़पता दिल भी था।
उस सूने आंगन को आज
भी हर कोई याद करता है
जहां कभी कल हमारा
बचपन बीता था।
लड़ाई भी चलती कितने दिन
आखिर खून की पुकार थी।
जब बीमार हुए थे ताऊ
चाची और ताई भी साथ थीं।
दीवार खामोशी की
फिर ढह गई थी,
और रिश्तों ने पकड़
बना ली थी।
वो आंगन फिर से
चहक उठा था
जब बच्चों की खिलखिलाहट
वहां गूंजने लगी थी।
उस सूने आंगन को आज
भी हर कोई याद करता है
जहां कभी कल हमारा
बचपन बीता था।।
शाहाना परवीन 'शान'...✍️
मुजफ्फरनगर